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जहां से मनु भाकर जैसी खिलाड़ी निकले, वहां का स्टेडियम बदतर; कांग्रेस MLA गीता भुक्कल ने उठाए बदहाली पर सवाल_我的网站

一 | 이재명 대통령이 지난 21일 청와대에서 열린 국민주권정부 제1차 반부패정책협의회에서 발언하고 있다. 정부의 부패방지 대책을 종합적으로 추진하기 위한 반부패 관계기관 장관회의인 반부패정책협의회는 이 대통령 취임 후 이날 처음으로 열렸다. 연합뉴스 이재명 대통령이 각 부처에 국민권익위원회의 공인회계사·세무사·변리사 등 전문자격시험 ‘공직경력 특례제도’ 폐지 권고를 제대로 이행하라고 지시한 것으로 26일 확인됐다. 이 대통령의 지시는 2030세대 지지율을 끌어올리기 위해 청년 정책을 강화하는 가운데 나왔다. 이 대통령은 지난 21일 주재한 제1차 반부패정책협의회에서 “각 부처에 공직경력 특례제도 폐지를 권고했고, 각 부처도 수용을 했는데, 잘 이행이 안되고 있다”는 정일연 권익위원장의 보고를 받은 뒤 “잘 이행하라”고 지시한 것으로 알려졌다. 공직경력 특례제도는 세무사, 변리사, 공인노무사, 공인회계사 등 15종의 국가전문자격시험에서 일정 공직 경력자에 대해 1, 2차 시험 전 과목 또는 일부 과목 시험을 면제해주는 제도다. 그러나 국가전문자격시험에 응시하는 청년층을 중심으로 이 제도가 일반 응시생과의 형평성에 어긋나고 공정한 경쟁을 가로막는다는 지적과 함께 제도 개선 요구가 이어졌다. 실제 2021년 9월 58회 세무사 2차 시험에서 공무원만 면제받은 과목의 과락률이 82.1%로 나타나 청년 응시생들의 비판이 컸다. 권익위는 2024년 공직경력 특례제도 폐지를 권고했다. 그러나 각 부처는 권익위 권고를 수용하고도 관련 법 개정안을 국회에 제출하지 않으면서 제도가 유지되고 있다. 권익위는 이 대통령의 지시에 따라 제2차 반부패정책협의회에서 부처별 이행 내용을 보고할 예정이다. 권익위 관계자는 “각 부처에 이행을 독려할 것”이라며 “다음 회의 때 각 부처가 공직경력 특례제도를 폐지하는 내용의 법 개정안을 왜 내지 않는지, 낸다면 언제까지 낼 것인지 등에 관해 이야기할 것”이라고 말했다.。 राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि झज्जर का दयानंद स्टेडियम बदतर हालात में है। यहां से मनु भाकर जैसे खिलाड़ी निकले हैं। सदन में हमने पहले भी स्टेडियम बनाने की मांग की थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।,शून्यकाल में अपने विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे उठाते हुए उन्होंने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट नेहरू कालेज की बिल्डिंग बहुत पुरानी हो चुकी है। इसका हास्टल बहुत खराब है। मेरी सरकार से मांग है कि क्षेत्र की समस्याओं को तुरंत ठीक किया जाए। वहीं, शून्यकाल से पहले भुक्कल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सदन में एक दिन पहले की गई विवादास्पद टिप्पणी का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। तब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सदन में मौजूद नहीं थे।,नारेबाजी करते कांग्रेस विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंची गीता भुक्कल ने कहा कि सरकार बताए कि आखिर शैतान शब्द का इस्तेमाल किसने किया है। इसी दौरान पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने उन्हें अपनी सीट की तरफ लौटने का इशारा किया, लेकिन इससे बेपरवाह भुक्कल अपने मुद्दे पर जमी रहीं, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी सदन में पहुंच गए तो पूर्व शिक्षा मंत्री ने उन्हें मामले से अवगत कराया।,इसके बाद कांग्रेस विधायकों और सत्ता पक्ष के बीच चले आरोप-प्रत्यारोपों में ऐसा हंगामा हुआ कि विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण को कहना पड़ा कि विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा। इसके बाद ही मामला शांत हुआ।。
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